स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना वैध लाइसेंस और पंजीकरण के इस प्रकार चिकित्सा सेवाएं देना कानून का खुला उल्लंघन है। ग्रामीणों ने बताया कि मामूली बीमारी से लेकर गंभीर मामलों तक का इलाज इन तथाकथित “फर्जी डॉक्टरों” द्वारा किया जा रहा है, जो कभी भी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।
क्षेत्रवासियों ने बसखारी सीएचसी प्रभारी अजय कुमार और संबंधित ड्रग्स इंस्पेक्टर से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि “हर चीज़ पैसा नहीं होता साहब, ज़िंदगी उससे कहीं ज़्यादा कीमती होती है।”
जनहित से जुड़े इस गंभीर विषय पर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की सक्रियता अब बेहद आवश्यक मानी जा रही है, ताकि आम जनता की जान से खिलवाड़ करने वालों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
